विटामिन डी कमी के लक्षण, होने वाले रोग ओर इसे कैसे बढ़ाएं

मित्रों भारत में विटामिन डी की कमी एक व्यापक समस्या है, जो आबादी के एक बड़े हिस्से को प्रभावित करती है इसीलिए आज के हेल्थ टिप्स मे जानते है विटामिन डी क्या है, डी विटामिन की कमी से कौन से रोग होते है ओर विस्तार से चर्चा करते है विटामिन D3 की कमी के लक्षणों पर, ओर समझते है की  शरीर मे इस विटामिन को कैसे बढ़ाएं, विटामिन D के लिए आहार ओर फल खाने चाहिए ओर मानवी शरीर के लिए इस विटामिन के क्या फायदे होते है। मित्रों आज का लेख आप के अच्छे सवास्थ के लिए काफी महत्वपूर्ण होने वाला है । आप से अनुरोध है की इसे अपने प्रियजनों के साथ आवश्य शेयर करे ।

मित्रों भारतीय मेडिकल संस्था ओर वैज्ञानिकों के विभिन्न अध्ययनों के अनुसार, यह अनुमान लगाया गया है कि 60-90% भारतीय आबादी में vitamin D की कमी  हो सकती  है।  इसमे प्रमुख कारण अपर्याप्त धूप में रहना, विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थों का कम आहार सेवन शामिल है। ,और पूरक आहार का कम उपयोग।आए इस विटामिन के प्रमुख पहलू  को विस्तार से जानते है ।

 

विटामिन डी क्या है

मित्रों जैसा की आप जानते है हमारे शरीर के विकास के लिए अलग अलग विटामिन ओर पोषक तत्वों की जरुरत होती है उनमे से एक है विटामिन D यह एक fat-soluble nutrient है जीसे हम हिंदी मे वसा में घुलनशील पोषक तत्व  कहते है। जो मानवी  स्वास्थ्य के कई पहलुओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसे अक्सर “सनशाइन विटामिन” कहा जाता है क्योंकि जब हमारी त्वचा सूर्य की पराबैंगनी (यूवी) किरणों के संपर्क में आती है तो हमारा शरीर इसका उत्पादन कर सकता है। डी विटामिन  कुछ खाद्य पदार्थों में भी पाया जाता है और इसे  पूरक आहार के रूप में लिया जा सकता है।

विटामिन डी
विटामिन डी

विटामिन D के सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में से एक शरीर में कैल्शियम और फास्फोरस के स्तर को  नियमित करना है, जो मजबूत हड्डियों के निर्माण और रखरखाव के लिए आवश्यक घटक हैं। डी विटामिन शरीर मे आहार से कैल्शियम को अवशोषित करने में मदद करता है, ऑस्टियोपोरोसिस और रिकेट्स जैसी स्थितियों को रोकता है।

विटामिन D के दो मुख्य रूप हैं: विटामिन D2 (एर्गोकैल्सिफेरॉल) और विटामिन D3 (कोलेकैल्सिफेरॉल)।

1. विटामिन D2 (डी2):

विटामिन डी2 पौधों द्वारा तयार होता है और कुछ खाद्य पदार्थों मे , जैसे कि मशरूम और पूरक आहार में पाया जाता है। यह विटामिन डी3 की तुलना में शरीर में विटामिन डी के स्तर को बढ़ाने में कम प्रभावी है।

2. विटामिन D3 (डी 3):

विटामिन डी3 और विटामिन डी अनिवार्य रूप से एक ही चीज हैं। विटामिन डी3 विटामिन डी का एक विशिष्ट रूप है, जिसे कॉलेकैल्सिफेरॉल भी कहा जाता है। यह विटामिन डी का रूप है । विटामिन D3 त्वचा में तब संश्लेषित होता है यानि यह त्वचा मे ही बनता है ।

त्वचा जब  सूर्य से निकली पराबैंगनी बी (यूवीबी) विकिरण के संपर्क में आता है तब यह विटामिन तयार होता है । यह कुछ पशु-व्युत्पन्न खाद्य पदार्थों में भी पाया जाता है, जैसे वसायुक्त मछली, अंडे की जर्दी और यकृत, और पूरक आहार के रूप में उपलब्ध है। शरीर में विटामिन डी के स्तर को बढ़ाने के लिए विटामिन डी3 को विटामिन डी का सबसे प्रभावी रूप माना जाता है।

विटामिन डी के दोनों रूपों को लीवर और किडनी द्वारा vitamin D के सक्रिय रूप में परिवर्तित किया जाता है, जिसे कैल्सीट्रियोल के रूप में जाना जाता है। कैल्सीट्रियोल शरीर में कैल्शियम और फॉस्फेट के स्तर को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार है, जो स्वस्थ हड्डियों और दांतों को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

 

विटामिन डी के फायदे

मित्रों हड्डियों के मजबूती के अलावा भी विटामिन डी के बहुत सारे फायदे होते है । मै यहा आप को आज हमारे लिए जो बेस्ट 19  संभावित फायदे Vitamin D के है उसे एक एक कर समझूँगा कृपया बेहतर सावस्थ के लिए इसे ध्यान से पढे ओर समझे :

1. हड्डियों के स्वास्थ्य में मदद करता है:

विटामिन डी शरीर को कैल्शियम को अवशोषित करने में मदद करता है, जो मजबूत हड्डियों और मजबूत दांतों के लिए अत्यंत आवश्यक घटक  है।

2. ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम को कम करता है:

विटामिन डी ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है, ऑस्टियोपोरोसिस ऐसी स्थिति जिसके कारण हड्डियां भंगुर, नाजुक ओर हो जाती हैं। ऐसे मे पर्याप्त विटामिन की मात्रा आप ऐसे भयंकर रोग ओर पीड़ा से बचाती है ।

3. प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है :

ईमूनों सिस्टम जीसे हम हिंदी मे प्रतिरक्षा प्रणाली या रोग प्रतिकारक शक्ति कहते है उसे  ठीक से काम करने में मदद करने के अलावा मजबूत करने का काम यह विटामिन करता है जिससे संक्रमण या इन्फेक्शन को रोकने में मदद कर सकता है।

4. ऑटोइम्यून रोगों के जोखिम को कम करता है:

विटामिन डी को मल्टीपल स्केलेरोसिस और रुमेटीइड की गठिया जैसे ऑटोइम्यून रोगों के जोखिम को कम करने में अपनी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका  निभाता  है।

5. हृदय स्वास्थ्य को बेहतर करता है:

हृदय से संबंधित विकार जैसे उच्च रक्तचाप  यानि हाई बीपी, दिल का दौरा और स्ट्रोक के जोखिम को कम करके विटामिन डी को हृदय स्वास्थ्य में सुधार करता है।

6. मस्तिष्क स्वास्थ्य को सुधारता है:

विटामिन डी को स्मृति, एकाग्रता और मनोदशा सहित बेहतर मस्तिष्क कार्यप्रणाली से जोड़ा गया है। यह आप के मानसिक सवास्थ को सुधार कर डिप्रेशन जैसी समस्या से दूर रखने मे मदत करता है । विटामिन डी को बेहतर मूड से जोड़ा गया है, और यह अवसाद और चिंता के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है।

7. मांसपेशियों के कार्य में सुधार करता है:

विटामिन डी मांसपेशियों को ठीक से काम करने में मदद करता है, उन्हे मजबूत कर  शारीरिक प्रदर्शन ओर शरारिक विकास मे में सुधार करने में मदद करता है। जिससे आप थकावट जैसी समस्या से दूर रहते है ओर अधिक तरो ताजा महसूस करते है ।

8. नेत्र स्वास्थ्य के लिए लाभदायक:

मित्रों विटामिन डी को स्वस्थ आंखों को बनाए रखने और उम्र से संबंधित नेत्र रोगों के जोखिम को कम करने लिए अत्यंत महत्वपूर्ण घटक माना गया है। यह आप के नेत्र सवास्थ को सुधार कर आप को स्पष्ट दुष्टि प्रदान करने मे मदत करता है ।

9. श्वसन स्वास्थ्य का समर्थन करता है:

विटामिन डी श्वसन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और श्वसन संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद करता है।

10 दंत स्वास्थ्य का समर्थन करता है:

स्वस्थ दांतों और मसूड़ों को बनाए रखने में विटामिन डी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह आप के दातों को मजबूत कर किड लगने से बचता है

11. कैंसर को रोकने में मदद कर सकता है:

कुछ प्रकार के कैंसर, जैसे हड्डी,स्तन, प्रोस्टेट और पेट के कैंसर के जोखिम को कम करने में विटामिन डी की भूमिका अहम देखि गयी है ।  लगातार डी विटामिन की कमी कैंसर का कारण बन सकती है । खतरे से आप को बचाने का काम विटामिन करते है ।

12. प्रजनन क्षमता अच्छा बानाने मे मदत करता है :

विटामिन डी को पुरुषों और महिलाओं दोनों में बेहतर प्रजनन क्षमता से जोड़ा गया है। यह विटामिन आप की प्रजनन क्षमता को निरंतर बेहतर बनाने मे मदत करता है ।

13. गर्भावस्था और शिशु स्वास्थ्य का समर्थन करता है: गर्भावस्था और शिशु के दौरान मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए विटामिन डी महत्वपूर्ण है।

14. किडनी स्वास्थ्य ओर लिवर के स्वास्थ्य में मदद करता है:

डी विटामिन लिवर की कार्यप्रणाली में मदद करता है और लिवर की बीमारी के जोखिम को कम करता है। इस विटामिन को स्वस्थ किडनी को बनाए रखने के लिए भी जाना जाता है जो आपके किडनी के सवास्थ को बेहतर रखता है

15. त्वचा के स्वास्थ्य बेहतर बनाता है: विटामिन डी को त्वचा के बेहतर स्वास्थ्य से जोड़ा गया है और यह एक्जिमा और सोरायसिस जैसी त्वचा की स्थिति के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है वही सफेद दाग Vitiligo बीमारी के दाग को भरने के लिए विटामिन डी मेलेनिन के उत्पादन को प्रोत्साहित करने में मदद कर सकता है जिससे आप की सफेद दाग की समस्या मे मदत मिलती है ।

16. घाव भरने में मदद करता है:

टिशू के ग्रोथ ओर रिपेर  को बढ़ावा देकर डि विटामिन  घाव भरने में विटामिन डी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शरीर में विटामिन डी का पर्याप्त स्तर कोलेजन के उत्पादन को बढ़ाने में मदद कर सकता है, जो एक प्रोटीन है जो त्वचा की मजबूती और लोच के लिए आवश्यक है। कोलेजन त्वचा और अन्य संयोजी ऊतकों का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो शरीर मे घाव भरने मे अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है ।

17. लाल रक्त कोशिका उत्पादन करता है:

विटामिन डी लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लाल रक्त कोशिकाएं, जिन्हें एरिथ्रोसाइट्स भी कहा जाता है, फेफड़ों से ऑक्सीजन को शरीर के बाकी हिस्सों में ले जाती हैं। विटामिन डी एरिथ्रोपोइटिन नामक हार्मोन के स्तर को नियंत्रित करके एरिथ्रोसाइट्स के उत्पादन को नियंत्रित करने में मदद करता है। एरिथ्रोपोइटीन गुर्दे में उत्पन्न होता है और अस्थि मज्जा को अधिक लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन करने के लिए उत्तेजित करता है।

विटामिन डी शरीर में कैल्शियम और फास्फोरस की मात्रा को नियंत्रित करने में भी मदद करता है, जो लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन और परिपक्वता दोनों के लिए आवश्यक हैं। इसके अतिरिक्त, विटामिन डी आहार से लोहे के अवशोषण को बढ़ावा दे सकता है, जो हीमोग्लोबिन के उत्पादन के लिए जरूरी है, लाल रक्त कोशिकाओं में प्रोटीन जो ऑक्सीजन लेती है।

18.यौन क्रिया का समर्थन करता है:

विटामिन डी पुरुषों और महिलाओं दोनों में यौन क्रिया को बनाए रखने में भूमिका निभाता है। पुरुषों में, विटामिन डी का टेस्टोस्टेरोन के स्तर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। टेस्टोस्टेरोन एक हार्मोन है जो कामेच्छा और शुक्राणु उत्पादन सहित यौन क्रिया के लिए महत्वपूर्ण है। “क्लिनिकल एंडोक्रिनोलॉजी” पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि विटामिन डी के निम्न स्तर वाले पुरुषों में विटामिन डी पूरक टेस्टोस्टेरोन के स्तर में वृद्धि के साथ जुड़ा हुआ था।

महिलाओं में,  डी विटामिन को बेहतर यौन कार्य और संतुष्टि से जोड़ा गया है। “स्त्री रोग और प्रसूति के अभिलेखागार” पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि विटामिन डी अनुपूरण यौन रोग के साथ महिलाओं में यौन क्रिया में सुधार करता है।

19. श्रवण स्वास्थ्य का समर्थन करता है:

अध्ययनों में विटामिन डी के स्तर और श्रवण क्रिया के बीच सकारात्मक संबंध पाया गया है।”इंटरनेशनल जर्नल ऑफ़ ऑडियोलॉजी” में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि विटामिन डी के निम्न स्तर वाले लोगों में विटामिन डी के सामान्य स्तर वाले लोगों की तुलना में श्रवण हानि होने की संभावना अधिक थी। “जर्नल ऑफ क्लिनिकल एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म” में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि उच्च विटामिन डी का स्तर वृद्ध वयस्कों में बेहतर श्रवण क्रिया होती है ।

बच्चे,महिला पुरुष ओर वयस्क के शरीर मे विटामिन डी कितना होना चाहिए

मित्रों मानव शरीर में या आहार पूरक में विभिन्न विटामिन, हार्मोन और अन्य पदार्थों की मात्रा को व्यक्त करने के लिए उसे  हमेशा IU मे मापा जाता है इसका फूल फॉर्म international units होता है जीसे हम हिंदी मे अंतरराष्ट्रीय इकाइयां कहते है। तो शरीर मे ग्राम या मिलीग्राम मे नहीं IU मे विटामिन लिया जाता है अब कितने IU विटामिन हमे लेना चाहिए इसको तय भी RDA की गाइडलाइंस तय करती है जीसे विश्व के सारे डॉक्टर मानते है ।

अब आपके मन मे प्रश्न होगा की ये RDA आरडीए क्या है इसका फूल फॉर्म होता है Recommended Dietary Allowance जीसे हम हिंदी मे अनुशंसित आहार भत्ता कहते है यह एक नियमावली होती है जो तय करती है की हमारे शरीर मे कोन सा विटामिन या पोषक तत्व दिन मे कितना लेना चाहिए कुन्की कोई विटामिन कम हो तो भी नुकसान देता है ओर जादा हो तो भी अच्छा नहीं होता

Vitamin D के मामले में, आरडीए का उपयोग विटामिन डी की मात्रा निर्धारित करने के लिए किया जाता है, जिसे पोषक तत्वों के पर्याप्त रक्त स्तर को बनाए रखने के लिए और यह सुनिश्चित करने के लिए कि वे अपने शरीर की जरूरतों को पूरा करते हैं। डी विटामिन के लिए आरडीए उम्र, लिंग और अन्य कारकों के आधार पर भिन्न होता है, और इसे नए शोध और साक्ष्य के आधार पर नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

आरडीए की नियम के अनुसार बच्चों, महिला पुरुष ओर वयस्क मे Vitamin D की मात्रा कितनी होनी चाहिए उसका टेबल नीचे दिया गया है

आयु वर्गअनुशंसित दैनिक मात्रा

(IU)

शिशु 0-12 महीने400-1000 IU
बच्चे 1-13 साल600-1000 IU
किशोर 14-18 वर्ष600-1000 IU
वयस्क 19-70 वर्ष600-4000 IU
वयस्क 70 वर्ष से अधिक आयु800-4000 IU
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं600-4000 IU

मित्रों उपर टेबल मे दिए हुए प्रमाण के अनुसार सिर्फ 70 साल से अधिक व्यक्तियों ही अतिरिक्त प्रमाण लग सकता है कुन्की बुढ़ापे मे हड्डियों की कमजोरी इसका प्रमुख कारण होता है । हालाकी आम तोर पर यह विटामिन डी रोज हमारे शरीर को  नैसर्गिक रूप से मिलता लेकिन कुछ विशेष परिस्थिति मे इसकी कमी हो जाती है जानते डी विटामिन के कमी के प्रमुख कारण

 

शरीर मे vitamin D की कमी के कारन

मित्रों जैसा मैने आप को शुरू मे बताया भारत सहित दुनिया भर के मेडिकल संस्था ओर सर्वे कह रहे है की भारत मे vitamin D के कमी 60 % से अधिक लोगों मे है । खास कर भारत एक पर्याप्त ओर 12 महीने सूर्य प्रकाश सम्पन्न देश है । फिर ये आकडे चिंता का विषय बने हुए है ऐसे मे vitamin D की कमी के कारन पर चर्चा करना अत्यावशक है ।

1.अपर्याप्त सूर्य प्रकाश :

विटामिन डी की कमी के मुख्य कारणों में से एक सूरज की रोशनी के लिए अपर्याप्त जोखिम है। शरीर विटामिन D  का उत्पादन तब करता है जब त्वचा सूर्य से पराबैंगनी (यूवी) किरणों के संपर्क में आती है। हालांकि, जो लोग कम धूप वाले क्षेत्रों में रहते हैं, जैसे कि वे जो उच्च अक्षांश पर रहते हैं, उनमें कमी का खतरा बढ़ जाता है।

इसके अतिरिक्त, वृद्ध वयस्क त्वचा के रंग  में परिवर्तन के कारण और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया के कारण सूरज के संपर्क में आने के बावजूद भी  विटामिन डी का उत्पादन करने में कम सक्षम होते हैं। जो बढ़ती उम्र मे आम बात है ।

2.विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थों की कमी :

डी विटामिन की कमी का एक अन्य कारण विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थों का कम सेवन करना है। विटामिन D से भरपूर खाद्य पदार्थों में वसायुक्त (fat) वाली मछली, अंडे की जर्दी और मशरूम शामिल हैं। हालांकि, कई लोगों के लिए, इन खाद्य पदार्थों को दैनिक आधार पर पर्याप्त मात्रा में प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जिससे अपर्याप्त सेवन और संभावित कमी हो सकती है।

भारत जैसे सनातनी हिन्दू देश मे लोग पूर्ण तोर पर शाकाहार का सेवन करते है जो अच्छी चीज है मगर कभी काभी यह भी vitamin D की कमी का कारण बन सकती है लेकिन आप घबराए नहीं मै आगे इस चीज का पूर्ण शाकाहारी समाधन भी आप को बताऊँगा ।

3. चिकित्सीय स्थितियाँ :

कुछ चिकित्सीय स्थितियाँ भी  डी  विटामिन की कमी में योगदान कर सकती हैं। उदाहरण के लिए, क्रोहन रोग और सीलिएक रोग से पीड़ित लोगों को भोजन से विटामिन डी अवशोषित करने में कठिनाई हो सकती है, क्योंकि इस पोषक तत्व को अवशोषित करने की उनकी क्षमता क्षीण हो सकती है।

4. मोटापा :

मोटापा भी डी विटामिन की कमी का एक कारण हो सकता है, क्योंकि मोंटे व्यक्तियों मे फैट कोशिकाएं विटामिन डी को स्टोर और अनुक्रमित कर सकती हैं, जिससे शरीर द्वारा vitamin D   उपयोग के लिए उपलब्ध मात्रा कम हो जाती है। ऐसे मे आप को बढ़ते वजन के कारण परेशानी का सामना करना पड सकता है ।

5. खराब जीवन शैली के कारन  :

खराब जीवन शैली के कारन  जैसे घर के अंदर बहुत अधिक समय बिताना, और शराब पीना भी विटामिन डी की कमी के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। उदाहरण के लिए,जबकि शराब का सेवन आहार से विटामिन डी के अवशोषण और उपयोग को कम कर सकता है।

6.सनस्क्रीन अति उपयोग 

खास कर हमारी महिलाये हर वक्त गोरा दिखने के लिए सनस्क्रीन लगाती है जिस से सूर्य की किरण मे त्वचा इक्स्पोज़ नहीं होती ओर आप इस विटामिन की कमी का सामना करना पड़ सकता है कुछ महिलाये तो सनस्क्रीन लगा के चेहरे पर स्क्रैप  बांधती है । उन्हे बाद मे गंभीर परिणामों का सामना करना पड सकता है सनस्क्रीन एक हद तक ठीक है लेकिन अति उपयोग नुकसान वाला हो सकता है ।

7. दवाएं :

कुछ दवाएं, जैसे कि एंटीकॉनवल्सेंट, ग्लूकोकार्टिकोइड्स और एंटी-ट्यूबरकुलोसिस दवाएं, विटामिन डी को अवशोषित करने और उपयोग करने की शरीर की क्षमता में हस्तक्षेप कर सकती हैं, जिससे कमी हो सकती है।

8. काली त्वचा:

आप ने बहोत बार सुना होगा मेलेनिन,एक पिग्मन्ट होता है जो त्वचा को ओर बालों को काला उसका रंग देता है, यह मेलेनिन त्वचा की सूर्य से विटामिन डी का उत्पादन करने की क्षमता को कम कर देता है। गहरे रंग की त्वचा वाले लोगों की कमी का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि उन्हें पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी का उत्पादन करने के लिए अधिक सूर्य के संपर्क की आवश्यकता होती है।

9. बुढ़ापा :

जैसा की मैने आप को पहेले बताया बुढ़ापा भी इस विटामिन के कमी का एक कारण होता है । जैसे-जैसे लोगों की उम्र बढ़ती है, उनकी सूर्य से और भोजन से विटामिन डी बनाने और अवशोषित करने की क्षमता कम हो जाती है। इससे वृद्ध वयस्कों में कमी का खतरा बढ़ सकता है।

विटामिन डी की कमी एक आम समस्या है जो दुनिया भर के लाखों लोगों को प्रभावित करती है। कमी के कारणों में अपर्याप्त सूर्य का जोखिम, विटामिन D  युक्त खाद्य पदार्थों की कमी, चिकित्सा की स्थिति, जीवन शैली के कारक और भौगोलिक स्थिति शामिल हैं।  डी विटामिन की कमी के जोखिम तब बढ़ जाता है जब इसके दर्दनाक लक्षण दिखते है ऐसे मे यह जानना जरूरी है की आखिर वो लक्षण है क्या ।

 

विटामिन डी 3 की कमी के लक्षणों

 

मित्रों जैसा की मैने पहेले बताया विटामिन डी का शरीर मे ऐक्टिव फॉर्म विटामिन डी3 होता है । विटामिन डी3 की कमी से कई प्रकार के लक्षण हो सकते हैं, जिनमें से कुछ सूक्ष्म और पता लगाने में मुश्किल होते हैं। विटामिन डी3 की कमी के कुछ सबसे सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:

1. कमजोर हड्डियां और मांसपेशियों में दर्द:

विटामिन डी3 शरीर में कैल्शियम और फास्फोरस के स्तर को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो मजबूत हड्डियों के लिए आवश्यक हैं। डी3 कमी से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है, साथ ही मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी भी होती है। इसके परिणाम स्वरूप जोड़ों की हड्डीया पीठ की हड्डी ओर अन्य प्रकार के हड्डियों मे निरंतर दर्द रहता है ।

2. थकान :

विटामिन डी3 के कमी  की वजह  से निरंतर थकान और थकावट जैसी समस्या  होती है, जिससे दैनिक गतिविधियों को करना भी  मुश्किल हो जाता है।कभी कभी आप बिना कुछ कम किए भी इस थकान को महसूस करते है । शरीर मे किसी भी विटामिन ओर पोषक तत्व की कमी का पहला लक्षण थकान ही है

3. डिप्रेशन :

विटामिन डी3 को बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए  लाभदायक होता  है, और इसकी  कमी से डिप्रेशन  और अन्य मानसिक स्वास्थ्य विकारों के संबंधी लक्षण दिखते है जैसे चिड़चिड़ा पण एकाग्रता मे कमी अनिद्रा । विटामिन डी 3 को बेहतर संज्ञानात्मक कार्य से जोड़ा गया है, और इसकी कमी से संज्ञानात्मक गिरावट हो सकती है, जिसमें स्मृति समस्याएं और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई शामिल है।

 4. पीठ ओर रीढ़ की हड्डी के विकार :

विटामिन डी3 की कमी से हड्डियों और पीठ में दर्द होता है खास कर यह दर्द आपकी कमर ओर गर्दन मे जादा होगा ओर आप को रीढ़ की हड्डी के विकार जैसे सायटिका के लक्षण भी दिख सकते है ।

5. घाव भरने में बाधा:

विटामिन डी3 घाव भरने की प्रक्रिया में शामिल होता है, और इसकी कमी घावों के ठीक होने की प्रक्रिया को धीमा कर सकती है और संक्रमण के जोखिम को बढ़ा सकती है। ऐसे मे साधारण चोट के घाव भरने मे बहोत दिक्कत ओर देरी का सामना करना पड सकता है । हाला की घाव न भरने के विटामिन डी3 के अलावा ओर भी कुछ कारण होसकते ही जैसे शुगर ओर अन्य बीमारी ऐसे मे टेस्ट कर के पता करना अत्यंत आवश्यक है की आप डी3 की कमी है या नहीं इसके लिए कोनसी टेस्ट होती है वो हम आगे देखेंगे

6. संक्रमण का बढ़ता जोखिम:

अन्य विटामिन ओर पोषण तत्वों की तरह विटामिन डी3 भी प्रतिरक्षा प्रणाली को नियमित करने में शामिल है, और इसकी कमी से श्वास के  संक्रमण और फ्लू , बुखार सहित अन्य  संक्रमण यानि इन्फेक्शन का  का खतरा बढ़ सकता है।

7. बालों का झड़ना:

स्वस्थ बालों के विकास के लिए विटामिन डी3 महत्वपूर्ण है, और इसकी कमी से बाल तेजी  झड़ सकते हैं या पतले हो सकते हैं।

8. त्वचा पर काले धब्बे:

कुछ मामलों में, विटामिन डी3 की कमी से त्वचा पर काले धब्बे हो सकते हैं, खासकर चेहरे और गर्दन कोहनी अन्डर आर्म ओर जांघ पर।

9. बच्चों में रुका हुआ विकास:

स्वस्थ वृद्धि और विकास के लिए विटामिन डी 3 महत्वपूर्ण है, और बच्चों में कमी से वृद्धि और अन्य विकास संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

10 अनिद्रा ओर नींद चक्र  में गड़बड़ी :

मानवी शरीर मे विटामिन डी3 नींद-जागने के चक्र को नियमित करने में शामिल है, और इसकी कमी से नींद में गड़बड़ी हो सकती है, जिसमें अनिद्रा और बेचैन नींद शामिल है। ओर हो सकता है की ये आपके पूरे नींद चक्र को ही डिस्टर्ब करे जैसे पूरी रात अनिद्रा ओर दिन भर नींद आलस ओर थकावट

11पाचन संबंधी समस्याएं:

विटामिन डी3 पाचन स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है, और इसकी कमी से कब्ज, दस्त और पेट दर्द सहित पाचन संबंधी समस्याएं के लक्षण दिखते है ।

12. दाँत क्षय:

आप के दांत ओर मौखिक स्वास्थ्य के लिए विटामिन डी 3 महत्वपूर्ण है, और इसकी कमी से दाँत और मसूड़ों की बीमारी संबंधित समस्या हो सकती है जैसे दांतों मे किड लगना, दर्द दांतों ओर मसूड़ों से खून पस निकलना ।

13. ऑटोइम्यून विकारों का बढ़ता जोखिम:

विटामिन डी3 को ऑटोइम्यून विकारों के विकास में भूमिका निभाने के लिए दिखाया गया है, और कमी से मल्टीपल स्केलेरोसिस और रुमेटीइड गठिया जैसी स्थितियों का खतरा बढ़ सकता है।

14 हृदय रोग का बढ़ता जोखिम:

विटामिन डी3 को हृदय रोग के जोखिम को कम करने के लिए दिखाया गया है, जिसमें दिल का दौरा और स्ट्रोक शामिल है, और कमी से इन स्थितियों का खतरा बढ़ सकता है।

15. कुछ प्रकार के कैंसरों का बढ़ता जोखिम:

विटामिन डी3 में कैंसर-रोधी गुण पाए गए हैं, और इसकी कमी से स्तन, प्रोस्टेट और पेट के कैंसर सहित कुछ प्रकार के कैंसरों का खतरा बढ़ सकता है।

 

मित्रों आमतोर विटामिन डी3 यही 15 लक्षण पाए जाते है अब आप बोलोगे की गूगल से लक्षण पता चले है बाजार से गोली लेके खाता हूँ तो ऐसा नहीं होता ।  सनातन भारतीय संस्कृति मे डॉक्टर को भगवान का रूप कहा गया वो इसलिए कुन्की वो सभी बीमारि का सटीक पता लगाते है । उपरोक्त 15 लक्षण किसी ओर बीमारी मे दिख सकते है इसलिए डॉक्टर विटामिन डी की कमी को जांच करने के लिए एक ब्लड टेस्ट करते है आए जानते है कोणसी है वो ब्लड टेस्ट जो पता लगती है विटामिन की कमी ।

 

विटामिन डी की कमी का पता लगाने के लिए कोणसी ब्लड टेस्ट होती है

मित्रों शरीर विटामिन डी3 की कमी को निर्धारित करने के लिए डॉक्टर आप को ब्लड टेस्ट करने के लिए कहते है उस  प्राथमिक परीक्षण ब्लड टेस्ट का नाम  25-हाइड्रॉक्सी है जो रक्त विटामिन डी का पर्याप्त प्रमाण तय करती है । यह परीक्षण रक्त में 25-हाइड्रॉक्सी विटामिन डी की मात्रा को मापता है, जो कि विटामिन डी3 की स्थिति का सबसे सटीक संकेतक है। इसे आपके रक्त का नमूना लेकर प्रयोग शाला यानि लैब  मे टेस्ट किया जाता है ।

भारत मे 25-हाइड्रॉक्सी टेस्ट की कीमत 750 से लेकर 1500 रुपये तक है जीसे लैब वाले अपनी मर्जी से चार्ज करते है लेकिन इतना याद रखे इस टेस्ट के लिए 1500 रुपये से अधिक कोई आप से न ले । यदि आप के शहर मे thyrocare लैब है तो वो 999 रुपये इसका चार्ज लेते है ।

हाइड्रॉक्सी 25 का सकारात्मक परिणाम यानि पाज़िटिव टेस्ट परिणाम इन्डकैट  करता है कि व्यक्ति के पास पर्याप्त विटामिन डी 3 का स्तर है, जबकि एक नकारात्मक परिणाम यानि नेगटिव टेस्ट बताती है की  विटामिन डी कमी है। रक्त में 25-हाइड्रॉक्सी विटामिन डी के स्तर का उपयोग कमी की गंभीरता को निर्धारित करने के लिए किया जाता है, निचले स्तर से अधिक गंभीर कमी का संकेत मिलता है।

अच्छे स्वास्थ्य के लिए 25-हाइड्रॉक्सी विटामिन डी का स्तर 30-100 ng/mL के बीच माना जाता है। वही 20-30 एनजी/एमएल के बीच का स्तर अपर्याप्तता माना जता है यह भी थोड़ी कमी को दर्शता है ।  लेकिन  20 एनजी/एमएल से नीचे के स्तर को डी विटामिन की गंभीर कमी के  रूप में परिभाषित किया जाता है । जिसके लिए आप की ट्रीट्मन्ट ओर दवा सप्लमेन्ट की जरूरत पड सकती है ।

विटामिन डी से होने वाले रोग

मित्रों शरीर मे  विटामिन डी की 20 एनजी/एमएल से नीचे के की लगातार कमी गंभीर बीमारी को जन्म दे सकती है डी विटामिन की कमी से नीचे दिए हुए बीमारी का खतरा होता है ।

1 रिकेट्स: रिकेट्स एक दुर्लभ बीमारी है जो बच्चों को प्रभावित करती है और हड्डियों के नरम और कमजोर होने का कारण बनती है। इससे विकृति हो सकती है, जैसे कि झुके हुए पैर और घुटने टेकना, और दर्द और चलने में कठिनाई हो सकती है।

2 अस्थिमृदुता: अस्थिमृदुता रिकेट्स के समान स्थिति है, लेकिन वयस्कों में होती है। यह कमजोर हड्डियों और मांसपेशियों की कमजोरी का कारण बनता है, और शारीरिक गतिविधि में दर्द और कठिनाई पैदा कर सकता है।

3 ऑस्टियोपोरोसिस: ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें हड्डियां भंगुर और नाजुक हो जाती हैं, और उनके टूटने की संभावना अधिक होती है। यह स्थिति वृद्ध महिलाओं में विशेष रूप से आम है, और विशेष रूप से कूल्हे, कलाई और रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है।

4 मांसपेशियों में कमजोरी और दर्द: मांसपेशियों के कार्य के लिए विटामिन डी महत्वपूर्ण है, और इसकी कमी से मांसपेशियों में कमजोरी और दर्द हो सकता है, खासकर पैरों और कूल्हों में। इससे शारीरिक गतिविधियां करना मुश्किल हो सकता है और गिरने का खतरा बढ़ सकता है।

5 हृदय रोग: विटामिन डी के निम्न स्तर को हृदय रोग और स्ट्रोक सहित हृदय रोग के बढ़ते जोखिम से जोड़ा गया है।

6 ऑटोइम्यून रोग: विटामिन डी प्रतिरक्षा प्रणाली में एक भूमिका निभाता है, और इसकी कमी को ऑटोइम्यून बीमारियों के बढ़ते जोखिम से जोड़ा गया है, जैसे मल्टीपल स्केलेरोसिस और टाइप 1 मधुमेह।

7 लम्बर स्पाइनल स्टेनोसिस: रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए विटामिन डी महत्वपूर्ण है, और कमी को लम्बर स्पाइनल स्टेनोसिस के बढ़ते जोखिम से जोड़ा गया है, एक ऐसी स्थिति जो पीठ के निचले हिस्से में तंत्रिका संपीड़न का कारण बनती है।

साथ ही स्लिप डिस्क, हरनेटेड डिस्क स्पोंनडलीसेस  जैसी रीढ़ की हड्डी के बीमारी डी विटामिन की कमी से होती है । भारत मे लगभग 50% से जादा लोग रीढ़ की हड्डी के बीमारी से त्रस्थ इस कमर दर्द के राहत के लिए ये पोस्ट  जरूर पढे  कमर दर्द केआयुर्वेदिक उपचार 

8 कैंसर: स्तन, प्रोस्टेट और पेट के कैंसर सहित कुछ प्रकार के कैंसर की रोकथाम और उपचार में विटामिन डी की भूमिका हो सकती है। विटामिन डी का निम्न स्तर इन कैंसर के बढ़ते जोखिम से जुड़ा हुआ है। हड्डियों के कैंसर का जोखिम निरंतर डी विटामिन की कमी का एक प्रमुख कारण हो सकता है ।

9 कटिस्नायुशूल: विटामिन डी उचित हड्डी और मांसपेशियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने में एक भूमिका निभाता है, और कमी को कटिस्नायुशूल के बढ़ते जोखिम से जोड़ा गया है, एक प्रकार का रेडिकुलोपैथी जो पैरों और पीठ के निचले हिस्से में दर्द का कारण बनता है।

 

विटामिन डी के आहार / डी विटामिन के स्त्रोत 

मित्रों अब तक आप समझ गए होंगे की पर्याप्त मात्रा मे सूर्यप्रकाश ही विटामिन का प्रमुख स्त्रोत है लेकिन कुछ ऐसे आहार भी है जिन से इस विटामिन की कमी को पूरा किया जा सकता है ।

विटामिन डी
विटामिन डी

1.वसायुक्त मछली: वसायुक्त मछली जैसे सैल्मन, ट्यूना और मैकेरल  डी विटामिन के अच्छे स्रोत हैं। उदाहरण के लिए, पके हुए सैल्मन,मछली को 100 ग्राम परोसने से लगभग 400-600 आईयू  डी विटामिन मिल सकता है।

2.  कॉड लिवर ऑयल: कॉड लिवर ऑयल एक लोकप्रिय पूरक है जो विटामिन डी, साथ ही विटामिन ए और ओमेगा -3 फैटी एसिड से भरपूर होता है। कॉड लिवर ऑयल का एक बड़ा चम्मच  डी विटामिन के 1,300 IU तक प्रदान कर सकता है।

3. अंडे की जर्दी: जबकि अंडे की सफेदी में विटामिन डी कम होता है, अंडे की जर्दी एक अच्छा स्रोत है। एक बड़े अंडे की जर्दी में लगभग 40 आईयू विटामिन डी होता है।

4.  मशरूम: कुछ प्रकार के मशरूम, विशेष रूप से जो यूवी प्रकाश के संपर्क में आते हैं,वो  विटामिन डी प्रदान कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, एक कप कटा हुआ, कच्चा, सफेद बटन मशरूम में लगभग 10 आईयू  डी विटामिन होता है।

5 दूध: लोगों को उनकी दैनिक जरूरतों को पूरा करने में मदद करने के लिए दूध को अक्सर विटामिन डी से समृद्ध समझा जाता ही । एक कप  दूध मे लगभग 100 आईयू विटामिन डी प्रदान करता है।

6  अनाज: कई नाश्ते के अनाज विटामिन डी से समृद्ध होते हैं, जिससे वे आपके सेवन को बढ़ावा देने का एक सुविधाजनक तरीका बन जाते हैं। गेंहूं , रागी, ओट्स, मक्के , चना दाल, सोया बीन, बाजरा, ज्वार, बार्ली  भी डी विटामिन के प्रमुख स्त्रोत है ।

7 ऑरेंज जूस: दूध और अनाज की तरह, संतरे के जूस के कई ब्रांड विटामिन डी से भरपूर  होते हैं। एक कप संतरे का जूस लगभग 100 आईयू  डी विटामिन प्रदान कर सकता है।

8 टोफू: टोफू  विटामिन डी से भरपूर होते हैं, जो इसे शाकाहारियों और शाकाहारियों के लिए एक अच्छा विकल्प बनाते हैं। फर्म टोफू के  100 ग्राम लगभग 157 आईयू विटामिन डी प्रदान कर सकते हैं। टोफू सोयाबीन के दूध से बने हुए दही को कहते है ।

9 पनीर: जबकि पनीर विशेष रूप से विटामिन डी का उच्च स्रोत नहीं है, कुछ प्रकार इसके साथ दृढ़ होते हैं। उदाहरण के लिए, गढ़वाले स्विस पनीर 25 ग्राम से  लगभग 6 आईयू विटामिन डी प्रदान कर सकता है।

मित्रों लोग मुझसे अक्सर डी विटामिन  के फल के बारे मे पूछते है विटामिन डी वाले फल मे आप पोर्टोबेलो मशरूम मैटेक मशरूम,चंटरले मशरूम शिटाकी मशरूम के साथ ऑरेंज यानि संतरे का प्रयोग कर सकते है ।

विटामिन डी कैसे बढ़ाएं :

1. अधिक धूप लें:

विटामिन डी को अक्सर “सनशाइन विटामिन” कहा जाता है क्योंकि जब हमारी त्वचा सूर्य की यूवी किरणों के संपर्क में आती है तो हमारा शरीर इसे बना सकता है। हर दिन कुछ समय धूप में बिताने से आपके विटामिन डी के स्तर को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। आवश्यक समय की मात्रा आपकी त्वचा की टोन, भौगोलिक स्थिति और दिन के समय जैसे कारनो के आधार पर भिन्न होती है। सुबह की धूप मे सूर्य नमस्कार या कोई भी व्यायम करना आप की डी कमी को पूरा कर् सकती है । 

2. विटामिन डी से भरपूर खाद्य पदार्थ खाएं:

कुछ खाद्य पदार्थों में स्वाभाविक रूप से डी विटामिन होता है, जिसमें वसायुक्त मछली जैसे सैल्मन, मैकेरल और टूना, साथ ही अंडे की जर्दी, ओर पनीर  शामिल हैं। दूध, संतरे का रस और अनाज जैसे कुछ खाद्य पदार्थ भी  डी विटामिन से समृद्ध हो सकते हैं। सनातनी भतीय शाकाहारी लोगों के लिए मशरूम ओर सोया अच्छा विकल्प है।  

3. विटामिन डी सप्लीमेंट लें:

यदि आप अपने आहार या धूप के संपर्क में आने से पर्याप्त डी विटामिन प्राप्त करने में असमर्थ हैं, तो आपको विटामिन डी सप्लीमेंट लेने की आवश्यकता हो सकती है। विटामिन डी की अनुशंसित दैनिक खपत उम्र और अन्य कारकों के आधार पर भिन्न होती है, लेकिन अधिकांश वयस्कों को प्रति दिन लगभग 600-800 IU (अंतर्राष्ट्रीय इकाइयों) की आवश्यकता होती है। लेकिन डी विटामिन का सप्लमेन्ट सिर्फ ओर सिर्फ डॉक्टर की सलाह से ले बिना डॉक्टर से पूछे या आवश्यकता न हो तो डी विटामिन सप्लमेन्ट हानिकारक हो सकते है । 

4. अपने सनस्क्रीन के उपयोग के प्रति सचेत रहें:

 आपकी त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से बचाना ने का काम सन स्क्रीन करता है ,लेकिन  सनस्क्रीन आपकी त्वचा की डी विटामिन का उत्पादन करने की क्षमता को भी अवरुद्ध कर सकता है। सनस्क्रीन के बिना कुछ समय धूप में बिताने की कोशिश करें, विशेष रूप से धूप के चरम घंटों के दौरान, अपने विटामिन डी उत्पादन को अधिकतम करें। आवशकता न हो तो सनस्क्रीन का उपयोग कम करे या न करे । 

5. स्वस्थ वजन बनाए रखें:

विटामिन डी
विटामिन डी

विटामिन डी वसा में घुलनशील विटामिन है, जिसका अर्थ है कि इसे शरीर में वसा यानि चरबी में संग्रहित किया जा सकता है। इससे अधिक वजन वाले या मोटे लोगों में विटामिन डी का स्तर कम हो सकता है। आहार और व्यायाम के माध्यम से स्वस्थ वजन बनाए रखने से इस समस्या को रोकने में मदद मिलती है। अपने वजन को नियंत्रित रखने से बाकी सवास्थ लाभ भी मिलते है । 

6. अधिक मैग्नीशियम प्राप्त करने पर विचार करें:

मैग्नीशियम डी विटामिन के स्तर को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है, क्योंकि यह शरीर द्वारा विटामिन के अवशोषण और उपयोग में भूमिका निभाता है। अपने आहार में अधिक मैग्नीशियम युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करने का प्रयास करें, जैसे कि बादाम, पालक और काली बीन्स।

7.  मल्टीविटामिन लें:

कई मल्टीविटामिन में डी विटामिन, साथ ही अन्य महत्वपूर्ण विटामिन और खनिज होते हैं। आप[ अपने डॉक्टर की सलाह से  मल्टीविटामिन  सप्लमेन्ट या टॉनिक ले सकते है । 

8.  अधिक शराब के सेवन से बचें:

अत्यधिक शराब का सेवन शरीर की विटामिन डी को अवशोषित करने और उपयोग करने की क्षमता में हस्तक्षेप कर सकता है, इसलिए शराब का सेवन कम मात्रा में करना महत्वपूर्ण है। शराब न पीना आप को अन्य स्वास्थ लाभ भी देते है इसलिए इस बुरी आदत को छोड़ना आप के लिए वरदान साबित हो सकता है । 

9.  धूम्रपान छोड़ें:

धूम्रपान शरीर की विटामिन डी को अवशोषित करने और उपयोग करने की क्षमता में भी हस्तक्षेप कर सकता है, इसलिए धूम्रपान छोड़ने से आपके विटामिन डी के स्तर में सुधार हो सकता है।
10 एक यूवी लैंप प्राप्त करें:

यदि आप ऐसे जगह रहते है जहा आप को पर्याप्त मात्रा मे सूर्यप्रकाश नहीं मिल पाता , तो एक यूवी लैंप आपके विटामिन डी के स्तर को बढ़ाने में मदद कर सकता है। यूवी लैंप का उपयोग करने से पहले अपने डॉक्टर से बात करें, क्योंकि इसके अति प्रयोग से जुड़े जोखिम हो सकते हैं।

11.धूप वाली जगह पर छुट्टी मनाए :

यदि आप धूप वाली जगह पर नहीं रहते ठंडे प्रदेशों मे रहते है तो  कुछ दी धूप वाली जगह  पर छुट्टियां बिताने से आपके डी विटामिन के स्तर को बढ़ाने का एक शानदार तरीका हो सकता है। बस धूप से सुरक्षा संबंधी सावधानियाँ बरतना याद रखें, जैसे सनस्क्रीन और टोपी पहनना। यह भारत के बाहर ठंडी जगह पर रहने वाले भाइयों के लिए 

12 अपने स्तर का परीक्षण करवाएं:

यदि आप अपने  डी विटामिन  के स्तर के बारे में चिंतित हैं, तो आप अपने स्तर की जांच के लिए अपने डॉक्टर से रक्त परीक्षण के लिए कह सकते हैं। यह आपको यह निर्धारित करने में मदद कर सकता है कि आपको आहार, पूरक आहार, या सूर्य के संपर्क में आने से विटामिन डी का सेवन बढ़ाने की आवश्यकता है या नहीं। यदि डीविटामिन  की कमी हो तो ही इसे बढ़ाने की जरूरत होती है। अनावश्यक अतिरिक्त विटामिन डी का सेवन सवास्थ के लिए नुकसान दे सकता है । 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल frequently asked question

1 पूरक आहार के बिना उच्च विटामिन डी स्तर का क्या कारण है

पूरक आहार के बिना उच्च विटामिन डी स्तर होने के कई संभावित कारण हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं:

सूर्य का संपर्क: सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आने पर त्वचा द्वारा विटामिन डी का उत्पादन किया जाता है। बिना सनस्क्रीन या सुरक्षात्मक कपड़ों के धूप में बहुत समय बिताने से विटामिन डी का उच्च स्तर हो सकता है।

आहार: कुछ खाद्य पदार्थ, जैसे वसायुक्त मछली, अंडे की जर्दी, और गढ़वाले डेयरी उत्पाद, विटामिन डी के अच्छे स्रोत हैं। इन खाद्य पदार्थों का अधिक मात्रा में सेवन करने से विटामिन डी का स्तर उच्च हो सकता है।

जेनेटिक्स: कुछ लोगों में एक अनुवांशिक प्रवृत्ति हो सकती है जिसके कारण उनमें विटामिन डी का उच्च स्तर होता है। इसे पारिवारिक हाइपरविटामिनोसिस डी के रूप में जाना जाता है।

चिकित्सीय स्थितियाँ: कुछ चिकित्सीय स्थितियाँ, जैसे सारकॉइडोसिस, तपेदिक और लिम्फोमा, विटामिन डी के उच्च स्तर का कारण बन सकती हैं। इन मामलों में, सूजन या बीमारी के जवाब में शरीर बहुत अधिक विटामिन डी का उत्पादन कर सकता है।

दवाएं: कुछ दवाएं, जैसे कि थियाजाइड मूत्रवर्धक और एंटीफंगल दवाएं, साइड इफेक्ट के रूप में विटामिन डी के उच्च स्तर का कारण बन सकती हैं।

यदि आप अपने विटामिन डी के स्तर के बारे में चिंतित हैं, तो अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से बात करना महत्वपूर्ण है। वे आपके विटामिन डी के स्तर को निर्धारित करने के लिए रक्त परीक्षण कर सकते हैं और यह निर्धारित करने में सहायता कर सकते हैं कि क्या कोई अंतर्निहित चिकित्सा स्थिति या दवाएं उच्च स्तर में योगदान दे रही हैं।

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