समान नागरिक संहिता यूनिफॉर्म सिविल कोड के फायदे ओर नुकसान

आज देश भर मे यूनिफॉर्म सिविल कोड कानून चर्चा का विषय बन चुका है कयास लगाया जा रहा है की संसद के इसी सत्र  मे UCC बिल आसकता ही । आज हम जानेंगे Uniform civil code in Hindi समान नागरिक संहिता आखिर क्या है ? इस कानून मे क्या प्रावधान है ? यूनिफॉर्म सिविल कोड के फायदे ओर यूनिफॉर्म सिविल कोड के क्या नुकसान हो सकते है । साथ ही जानते है की भारतीय सविधान मे पहिले से मौजूद समान नागरिक संहिता के प्रावधानों के बारे मेओर सुरक्षित करेंगे नारी शक्ति का अधिकार

मित्रों देश का विपक्ष समान नागरिक संहिता काफी भ्रम फैला रहा है आज इसी विषय पर सत्य का प्रहार विशेष संपादकीय मे करते है हर झुट के कपाल पे सत्य के कड़े प्रहार आए सबसे पहले जानते है समान नागरिक संहिता के बारे मे क्या कहता है भारतीय संविधान का अनुच्छेद 44 । 

संविधान का अनुच्छेद 44 मे समान नागरिक संहिता उल्लेख 

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 44 समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से संबंधित है। अनुच्छेद 44 कहता है:”राज्य पूरे भारत में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा।”  लेकिन आजादी के 70 साल बाद भी देश मे समान नागरी संहिता लागू करने मे अधिकतर राज्य सरकार विफल रही ।

अनुच्छेद 44 भारतीय राज्य को एक समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में प्रयास करने का निर्देश व्यक्त करता है जो सभी नागरिकों के लिए, उनकी धार्मिक संबद्धताओं के बावजूद, विवाह, तलाक, विरासत और ऐसे अन्य मामलों से संबंधित व्यक्तिगत कानूनों को नियंत्रित करेगा।

हालाँकि  अनुच्छेद 44 यूसीसी के तत्काल कार्यान्वयन को अनिवार्य नहीं करता है। यह समान नागरिक संहिता प्राप्त करने की दिशा में काम करने के राज्य के इरादे और उद्देश्य को व्यक्त करता है, लेकिन उचित कानून बनाने और उस दिशा में प्रगति करने की जिम्मेदारी सरकार  की है।

यूसीसी का कार्यान्वयन भारत में चल रही बहस और चर्चा का विषय बना हुआ है, इस मामले पर अलग-अलग राय और दृष्टिकोण हैं। लेकिन देश की हर बेटी के आसू देश के राज्यकर्ता से पूछ रहे है आखिर ट्रिपल तलाक, बहुपत्नी कब तक कब मिलेगा विरासत मे अधिकार ?

 

 

समान नागरिक संहिता ओर यूनिफॉर्म सिविल कोड के फायदे
समान नागरिक संहिता ओर यूनिफॉर्म सिविल कोड के फायदे

 

यूनिफॉर्म सिविल कोड क्या है (Uniform civil code in hindi समान नागरिक संहिता )

देखिए आसान शब्दों मे कहे तो  यूनिफॉर्म (Uniform) अर्थ होता है समान सिविल (civil) का अर्थ होता है नागरिक ओर  कोड (code) यानि संहिता अगर समूचे शब्द को देखा जाए तो यह कोई कानून नहीं है बल्कि भारत के नागरिकों के लिए यह एक नियमावली वैसे जैसे स्कूल या कॉलेज code of conduct  रहता है ।

अब समझिए समान नागरिक संहिता (यूसीसी) कानूनों के एक प्रस्तावित सेट को संदर्भित करता है जो भारत के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों को नियंत्रित करेगा, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो। वर्तमान में, भारत में व्यक्तिगत कानून धार्मिक रीति-रिवाजों और परंपराओं पर आधारित हैं, और विभिन्न धार्मिक समुदायों के पास इन मामलों के लिए अपने विशिष्ट कानून हैं।

जैसे हिन्दू धर्म के लिए हिंदू मेरेज ऐक्ट है यंहा शादी ओर तलाक दोनों कानून से होते है मौजूदा पत्नी के होते हुए दूसरी शादी नहीं कर सकते लेकिन मुस्लिम भाइ तथा अन्य धर्म मे आज भी बाल विवाह, एक से जादा शादी करना ओर इन्स्टेन्ट ट्रिपल तलाक होते है । मित्रों खासकर मुस्लिम धर्मिय लोग शादी ,तलाक जैसे मामलों मे शरीया कानून के तहत चलते है ।

समाज मे धार्मिक आधार पर मन मर्जी कानून, एक से जादा शादी ओर बेटियों का विरासत मे अधिकार न होना यह हिन्दू धर्म मे होता है महिला ओर बेटियों के प्रति यही असमानता खत्म करने के लिए यूसीसी लागू करने के विचार पर भारत में कई वर्षों से बहस चल रही है। समर्थकों का तर्क है कि एक समान संहिता धर्म के आधार पर व्यक्तिगत कानूनों में मौजूद असमानताओं और भेदभावपूर्ण प्रथाओं को खत्म करके समानता, धर्मनिरपेक्षता और लैंगिक न्याय को बढ़ावा देगी। उनका मानना है कि यह एक सामान्य ढांचा प्रदान करेगा जो सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार करेगा।

दूसरी ओर, विरोधियों का तर्क है कि व्यक्तिगत कानून धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक विविधता का एक अभिन्न अंग हैं, और यूसीसी लागू करने से इन अधिकारों का उल्लंघन होगा। अगर सीधे शब्दों मे विरोधियों का तर्क कहु तो उन्हे 4 शादी करने, ओर ट्रिपल तलाक मे तो शारिया कानून चाहिए लेकिन चोरी करने पे हात काटने नहीं  यहा पर आईपीसी चाहिए ।

मित्रों ऐसा अब नहीं चलेगा यह नया भारत एक भारत है ओर इस एक भारत मे एक ही कानून चलेगा डॉक्टर बाबा साहब आंबेडकर ने लिखा हुवा सविधान ओर उस सविधान मे लिखा हुआ अनुच्छेद 44 जो कहता है बहन बेटियों का अधिकार यूनिफॉर्म सिविल कोड । अबआप के मन मे रहा होगा की ऐसा क्या खस है यूनिफॉर्म सिविल कोड मे तो आए चर्चा करते है इस कानून मे मौजूद कुछ विशेष प्रावधानों पर  ।

 

कैसा होगा यूनिफॉर्म सिविल कोड समान नागरिक संहिता मे क्या प्रावधान होंगे 

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के तहत, विचार यह है कि कानूनों का एक सेट बनाया जाए जो भारत के सभी नागरिकों के लिए व्यक्तिगत मामलों को नियंत्रित करे, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो। वर्तमान में, भारत में व्यक्तिगत कानून विभिन्न धार्मिक समुदायों के लिए विशिष्ट हैं, जैसे हिंदू व्यक्तिगत कानून, मुस्लिम व्यक्तिगत कानून, ईसाई व्यक्तिगत कानून, आदि।

यदि यूसीसी लागू किया जाता है, तो इन व्यक्तिगत कानूनों को कानूनों के एक एकीकृत सेट द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा। सभी नागरिकों पर लागू होगा। यहां कुछ प्रमुख क्षेत्र हैं जो यूसीसी के दायरे में आएंगे:

1. विवाह: यूसीसी विवाह से संबंधित नियमों को कवर करेगा, जिसमें विवाह की उम्र, वैध विवाह की शर्तें, विवाह का पंजीकरण और एक विवाह/बहुविवाह नियम शामिल हैं। Uniform civil code in hindi समान नागरिक संहिता के तहत भारत के किसी भी नागरिक को बाल विवाह ओर पहिली पत्नी के होते हुए दूसरी शादी या बहुविवाह करने की अनुमति नहीं होगी कुछ धर्मों मे एक से जादा शादी आज भी की जाती है ।

इस कानून को विरोध करने वाले कुछ असामाजिक तत्व यह भ्रम फैला रहे है की विवाह पद्धति सभी धर्मों के लिए एक होगी ऐसा बिल्कुल नहीं नहीं है हर कोई अपनी मर्जी से अपने धर्म के अनुसार शादी कर सकता है लेकिन 4 शादी करने की अनुमति नहीं मिलेगी ओर न ही किसी नाबालिक लड़की से शादी कर सकोगे आप ।

2. तलाक: इस कानून के तहत तलाक की कार्यवाही, तलाक के लिए आधार और तलाक प्राप्त करने की प्रक्रियाओं के लिए एक सामान्य ढांचा प्रदान कर दिया जाएगा। व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म का हो उसे भारतीय सविधान के तहत कोर्ट से ही तलाक लेना पड़ेगा । पहेले की तरह 3 बार तलाक बोलने से तलाक नहीं हो सकता पूरी कानूनी प्रोसेस फॉलो करनी ही होगी ।

3. विरासत:  यूसीसी किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद संपत्ति और संपत्ति के वितरण को नियंत्रित करेगा, जिसमें उत्तराधिकार के नियम, विरासत के अधिकार और वसीयत शामिल हैं। मित्रों इस कानून के तहत देश की बेटियों को अपने पिता तथा पति की संपत्ति मे बराबर हिस्सा मिलने का प्रावधान है ।  यह नियम पहेले भी था लेकिन उस मे कुछ शीतिलथा थी समान नागरिक संहिता के तहत बेटीओ को विरासत मे अधिकार मिलगा ही मिलेगा

4. दत्तक ग्रहण: गोद लेने के लिए विनियम और दिशानिर्देश, इसमें शामिल पक्षों के धर्म की परवाह किए बिना, यूसीसी में शामिल किए जाएंगे। इसमे हो सकता है की बच्चा गोद लेने के बाद आप किसी खास धर्म को फॉलो करने की जोर जबरदस्ती उसे नहीं कर सकते जो की मानवता की दृष्टि जरूरी  है ।

5. भरण-पोषण और गुजारा भत्ता: एक यूसीसी तलाक या अलगाव के बाद पति-पत्नी और आश्रितों के लिए भरण-पोषण और गुजारा भत्ता से संबंधित मुद्दों का समाधान करेगा। हो सकता है की इसमे मोदी जी वयस्क नागरिक यानि माता पिता के भरण पोषण संबंधी कुछ दिशा निर्देश जारी करे ।

6. संरक्षकता: यह नाबालिगों और अक्षम व्यक्तियों की संरक्षकता के संबंध में समान नियम स्थापित करेगा।

7. व्यक्तिगत संपत्ति और स्वामित्व: व्यक्तिगत संपत्ति, उसके स्वामित्व और हस्तांतरण से संबंधित नियम यूसीसी के अंतर्गत आएंगे।

8. उत्तराधिकार और निर्वसीयत कानून: यह उन मामलों के लिए समान कानून प्रदान करेगा जहां कोई व्यक्ति वैध वसीयत छोड़े बिना मर जाता है। ऐसी स्थिति मे कानून के मुताबिक बेटी समेत सभी उत्तराधिकारिओ को उस संपत्ति मे समान हिस्सा दिया जाएगा ।

9. विवाह समारोहों और अनुष्ठानों में एकरूपता:  यूसीसी विवाह समारोहों और अनुष्ठानों में एकरूपता को बढ़ावा देने का प्रयास करेगा। यानि विवाह ओर अन्य चीजों को समांतर कर सामाजिक भेद भाव को मिटाने की कोशिश की जाएगी हो सकता है की विवाह के खर्च पर कोई मर्यादा हो जिस से सामाजिक भेद भाव न रहे ।

10. जीवनसाथी के अधिकारों और जिम्मेदारियों में एकरूपता: यह सुनिश्चित करेगा कि सभी समुदायों में पति-पत्नी के अधिकार और जिम्मेदारियां एक समान हों। पति ओर पत्नियों के बीच अधिकारों मे समानता लाने की कोशिश समान नागरिक संहिता से होगी

यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि यूसीसी का दायरा और विशिष्ट प्रावधान भारत सरकार द्वारा अधिनियमित कानून पर निर्भर होंगे। भारत में व्यक्तिगत कानूनों की संवेदनशील प्रकृति और धार्मिक प्रथाओं की विविधता को देखते हुए, जब भी ये कानून संसद मे आएगा उस मे थोड़े बहोत बदलाव संभव है न्यूज सत्य का प्रहार कानून की सिर्फ आउट्लाइन दे सकता है सही कानून सिर्फ मोदी जी ही बनाएंगे ।

Uniform civil code in hindi समान नागरिक संहिता
Uniform civil code in Hindi समान नागरिक संहिता

यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू करने की प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं

चुनौतियाँ की बात करे तो मुस्लिम वोटों का तुष्टीकरण करने वाली देश की राजनेतिक पार्टिया समान नागरिक संहिता के आड़े आती है फिर चाहे काँग्रेस हो समाजवादी पार्टी, बसपा ओर उबाठा शिव सेना गुट। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करना कई बड़ी चुनौतियों का सामना करता है। ये चुनौतियाँ देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक परिदृश्य की जटिलता से उत्पन्न होती हैं। कुछ प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं:

1. धार्मिक भावनाएँ: भारत में व्यक्तिगत कानून धार्मिक प्रथाओं में गहराई से निहित हैं, और उन्हें एक समान संहिता के साथ बदलने के किसी भी प्रयास को धार्मिक स्वतंत्रता और स्वायत्तता के लिए खतरा माना जा सकता है। धार्मिक समुदाय ऐसे परिवर्तनों का विरोध कर सकते हैं, जिससे सामाजिक और राजनीतिक तनाव पैदा हो सकता है।

जैसा की मैने शुरू मे कहा मुस्लिम समाज मे एक से जादा बीवी ओर काजी के उपस्थिति मे ट्रिपल तलाक जायज है ओर मुस्लिम उलेमा, मौलवी ओर मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड का विरोध इस कानून बनाने मे प्रमुख चुनोती है । 

2. सर्वसम्मति का अभाव: यूसीसी के विशिष्ट प्रावधानों और प्रकृति पर राजनीतिक दलों, धार्मिक समूहों और हितधारकों के बीच कोई व्यापक सहमति नहीं है। समझौते की यह कमी यूसीसी को लागू करने के लिए एकीकृत दृष्टिकोण तैयार करना मुश्किल बना देती है।  बेटी को हिस्सेदारी जैसे मुद्दे पे हिन्दू समाज से भी इस कानून का विरोध हो सकता है । 

विपक्ष I.N.D.I.A. नाम का नया गटबंधन पुरुषवादी तथा अल्पसख्यक मतों की तुष्टीकरण वाली राजनीति करते है ।  ऐसे मे पुरुषवादी  मानसिकता वाली विपक्ष का विरोध समान नागरिक संहिता कानून पास कराने मे बड़ा अड़ंगा डाल सकता है । 

3. कानूनी जटिलताएँ: यूसीसी को अधिनियमित करने के लिए मौजूदा व्यक्तिगत कानूनों में महत्वपूर्ण संशोधन की आवश्यकता होगी, जो समय के साथ विकसित हुए हैं और जिनका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। कानूनी जटिलताओं और संभावित विवादों को संबोधित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होगा। हाला की मोदी सरकार द्वारा 370 कलम को हटाते वक्त ऐसे जटिलता को सुलझाने का अच्छा अनुभव है । 

4. विविध सांस्कृतिक प्रथाएँ: भारत की सांस्कृतिक विविधता विशाल है, और विभिन्न समुदायों की अपनी अनूठी प्रथाएँ और रीति-रिवाज हैं। सांस्कृतिक पहचान का सम्मान करते हुए एक समान संहिता के तहत इन विविध प्रथाओं का सामंजस्य बनाना एक जटिल उपक्रम है। जैसे कुरान ओर हादिसो के मुताबिक मुस्लिम समाज मे एक से जादा शादी जायज ओर हिन्दू समाज मे लड़की की शादी के बाद सिर्फ लड़के को ही उत्तराधिकारी बनाया जाता है यह धार्मिक प्रथा समाज प्रबोधन से बदली जा सकती है । 

5. लैंगिक मुद्दे: जबकि समर्थकों का तर्क है कि यूसीसी लैंगिक असमानताओं को संबोधित कर सकता है, इसे सावधानीपूर्वक डिजाइन किया जाना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह अनजाने में मौजूदा भेदभावपूर्ण प्रथाओं को कायम नहीं रखता है या महिलाओं के अधिकारों पर नकारात्मक प्रभाव नहीं डालता है।

6. रूढ़िवादी तत्वों का विरोध: समुदायों के भीतर परंपरावादी या रूढ़िवादी तत्व ऐसे किसी भी बदलाव का विरोध कर सकते हैं जिसे वे अपने स्थापित रीति-रिवाजों और परंपराओं को चुनौती देने वाला मानते हैं। सिर्फ मुस्लिम मोलवी उलेमा ही नहीं बल्कि पर्सनल लॉ बोर्ड ओर MIM पार्टी ने इस कानून का अभी से विरोध करना शुरू कर दिया है । 

7. राजनीतिक विचार: Uniform civil code के मुद्दे का अत्यधिक राजनीतिकरण किया गया है, और राजनीतिक दल प्रस्ताव की खूबियों के बजाय अपनी चुनावी गणनाओं के आधार पर इस पर विचार कर सकते हैं। भारत की राजनीति ओर वोटिंग जाती के आधार पर होती है  लग भग 15% मुस्लिम वोट एक साथ पाने के लिए सो कॉल्ड सेक्यलर पार्टी मे इस कानून का विरोध करने की होड लगी है । 

8. राज्य की स्वायत्तता: भारत की संघीय संरचना राज्यों को व्यक्तिगत कानूनों सहित कुछ मामलों में महत्वपूर्ण स्वायत्तता प्रदान करती है। सभी राज्यों को एक समान संहिता अपनाने के लिए राजी करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसी का समाधान निकालने के लिए केंद्र सरकार ने समान नागरिक संहिता मुद्दा अपने हात मे लिया है ओर केंद्र मे बैठी मोदी सरकार संसद मे कानून पास कराने का विचार कर रही है । 

9. प्रवर्तन और कार्यान्वयन: विशाल और विविध देश में यूसीसी का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना एक तार्किक चुनौती हो सकती है, खासकर सीमित प्रशासनिक संसाधनों वाले क्षेत्रों में। जैसा की मैने शुरू मे कहा था यूनिफॉर्म सिविल कोड कानून नहीं बल्की भारत के नागरिकों के लिए एक आचार संहिता है इसी लिए भारत के हर व्यक्ति की यह जिम्मेदारी होगी की वो इस कानून का पालन कर सरकार का सहयोग करे । 

10. सामाजिक प्रभाव: यूसीसी को लागू करने जैसे महत्वपूर्ण बदलाव के दूरगामी सामाजिक प्रभाव हो सकते हैं, और आबादी के विभिन्न वर्गों पर संभावित परिणामों पर विचार करना और उनका समाधान करना आवश्यक है।

11. सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण: आलोचकों का तर्क है कि यूसीसी को लागू करने से विभिन्न धार्मिक और जातीय समुदायों के लिए सांस्कृतिक पहचान का नुकसान हो सकता है।

12. कानूनी सामंजस्य: धार्मिक व्यक्तिगत कानूनों की विविध व्याख्याओं को एक समान संहिता के साथ संरेखित करना जटिल हो सकता है और इसके लिए सावधानीपूर्वक कानूनी प्रारूपण की आवश्यकता होती है।

13. सार्वजनिक स्वीकृति और जागरूकता: आम जनता यूसीसी के निहितार्थों को पूरी तरह से नहीं समझ सकती है, जिससे गलत सूचना, गलत धारणाएं और प्रतिरोध होता है।

14. गोद लेने के कानूनों में जटिलता: विविध सांस्कृतिक प्रथाओं पर विचार करने वाला एक सामान्य गोद लेने का कानून बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

15. अंतरधार्मिक विवाह: अंतरधार्मिक विवाहों के लिए सभी समुदायों के लिए स्वीकार्य नियमों और प्रक्रियाओं को परिभाषित करना कठिन हो सकता है।

16. संवैधानिक चुनौतियाँ: कोई भी कानून जो धार्मिक व्यक्तिगत कानूनों को संशोधित करना चाहता है, उसे संवैधानिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, खासकर अगर इसे धर्म का पालन करने के अधिकार में हस्तक्षेप के रूप में देखा जाता है।

17. सामाजिक सुधार और परंपरा को संतुलित करना: सामाजिक सुधारों को बढ़ावा देने और सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का सम्मान करने के बीच संतुलन बनाना एक नाजुक काम है।

18. कानूनी सहारा और समीक्षा: यूसीसी के कार्यान्वयन से कानूनी चुनौतियां और समीक्षा की मांग हो सकती है, जिससे प्रक्रिया और लंबी हो सकती है।

19. समय और राजनीतिक इच्छाशक्ति: यूसीसी के सफल कार्यान्वयन के लिए सही राजनीतिक माहौल और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति महत्वपूर्ण हैं। केंद्र मे नरेंद्र मोदी जी की सरकार पूर्ण बहुमत वाली सरकार है इसलिए यही वो खास मोका है की महिला के अधिकारों को न्याय देने वाला Uniform civil code in hindi समान नागरिक संहिता कानून देश की संसद से पास हो । 

20. संपत्ति और विरासत कानूनों में जटिलता: विविध विरासत और संपत्ति कानूनों को संबोधित करना और समान वितरण सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

इन चुनौतियों को देखते हुए, यूसीसी को लागू करने के लिए सावधानीपूर्वक विचार, व्यापक सर्वसम्मति निर्माण और एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता होगी जो समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को बढ़ावा देते हुए धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान करता हो।

 

यूनिफॉर्म सिविल कोड के फायदे

भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने से विभिन्न संभावित लाभ हो सकते हैं। यहां 20 संभावित लाभ दिए गए हैं जिन्हें यूसीसी के समर्थक अक्सर उजागर करते हैं:

1. समानता: समान नागरिक संहिता सभी नागरिकों पर लागू कानूनों का एक सामान्य सेट प्रदान करके समानता को बढ़ावा देगा, चाहे उनकी धार्मिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो। सभी धर्मों के सभी स्त्री पुरुषों को समान न्याय मिलेगा ओर सामाजिक समनता ही इसका प्रमुख लक्ष होगा । 

2. एक से अधिक विवाह पर रोक : व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म का हो पहिली पत्नी के होते हुए उसे कानूनी तोर पे तलाक दिए बिना  इस कानून के तहत दूसरी शादी नहीं होगी आज भी खास कर मुस्लिम धर्म मे एक साथ 4 बीवी रखने की प्रथा है जो इस कानून से पूरी तरह बंद होगी ओर मुस्लिम बहनों को सही रूप से न्याय मिलेगा । 

3. बाल विवाह पे लगेगी रोक : आज भी भारत मे कई धर्म ओर जाती मे बाल विवाह होते है समान नागरिक संहिता यानि यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होते ही सभी धर्मों मे बाल विवाह पर कानूनी रोक लगेगी । प्रगतिशील भारत के लिए यह ऐतिहासिक कदम होगा । 

4. गैरकानूनि तलाक होगा बंद : समान नागरिक संहिता से गैरकानूनी तलाक ट्रिपल ललक जैसे धार्मिक आधार पर अधार्मिक प्रथा पर रोक लगेगी व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म किसी भी जाती का हो उसे कानूनी तोर पर कोर्ट से तलाक लेना होगा ओर इस कानून के तहत तलाक के बाद उस महिला को भरण पोषण भी देना होगा इस से खास कर मुस्लिम माहिलाओ को सही रूप से न्याय मिलेगा । 

5. प्रॉपर्टी मे मिलेगा बेटी को अधिकार : समान नागरिक संहिता कानून से शादी के बाद भी बेटी को अपने पिता की प्रॉपर्टी मे बराबर का हिस्सा मिलेगा यह यह आज भी कुछ राज्यों मे नियम अस्तित्व मे है लेकिन यूनिफॉर्म सिविल कोड के लागू होते ही अब कानूनी तोर से बेटी का अपने पिता ओर पती दोनों की प्रॉपर्टी मे आधिकारिक तोर पर हिस्सेदारी होगी । 

यूनिफॉर्म सिविल कोड के फायदे
यूनिफॉर्म सिविल कोड के फायदे

7. धर्मनिरपेक्षता: समान नागरिक संहिता कानून के तहत सभी नागरिकों के साथ उनकी धार्मिक मान्यताओं के बावजूद समान व्यवहार करके धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत को कायम रखेगा। देश मे धार्मिक असमानता खत्म कर सामाजिक न्याय से अलग आलग धर्म ओर जाती को जोड़ने का काम समान नागरिक संहिता से संभव होगा ओर इस से एक भारत श्रेष्ठ भारत का प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष पूरा होगा । 

8. लैंगिक न्याय:  यूसीसी व्यक्तिगत कानूनों में मौजूद लैंगिक असमानताओं को संबोधित कर सकता है और महिलाओं के लिए समान अधिकार और अवसर सुनिश्चित कर सकता है। देश मे अभी भी महिला के अधिकार कम है इस से उन्हे अधिक अवसर ओर न्याय तो मिलेगा ही लेकिन अधिकारों से वंचित तृतीय पंथी लोगों के लिए सामाजिक न्याय ओर अवसर प्रदान किया जाएगा 

9. एकरूपता: समान नागरिक संहिता पूरे देश में एक सतत कानूनी ढांचा स्थापित करेगा, जिससे कई व्यक्तिगत कानूनों से उत्पन्न भ्रम और जटिलताओं को कम किया जा सकेगा। 

10. सामाजिक एकजुटता: समान नागरिक संहिता धार्मिक संबद्धता के आधार पर विभाजन के बजाय एक साझा नागरिक संहिता पर जोर देकर सामाजिक सद्भाव और एकता को बढ़ावा दे सकता है ओर इस से देश पहेले से जादा प्रगति की रफ्तार हासिल करने मे कमियाब होगा । 

11. आधुनिकीकरण: यह व्यक्तिगत कानूनों के सुधार और आधुनिकीकरण को सक्षम करेगा, उन्हें समकालीन सामाजिक मूल्यों के साथ संरेखित करेगा। सामाजिक न्याय ओर सामाजिक धार्मिक आधुनिकरण भारत के महासत्ता बनने के सपने को समय से पहेले पूरा कर पाएगा । 

12. व्यक्तिगत अधिकारों की सुरक्षा:  यूसीसी एक सामान्य कानूनी ढांचा प्रदान करके व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा करेगा जो संविधान द्वारा गारंटीकृत मौलिक अधिकारों का सम्मान करता है। समान नागरिक संहिता से भारतीय सविधान ओर मजबूत होगा ओर विश्व मे ओर भी सम्मान हासिल करेगा 

13. सरलीकरण: समान नागरिक संहिता सभी नागरिकों पर लागू कानूनों का एक सेट बनाकर विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने से संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बना देगा।

14. भेदभावपूर्ण प्रथाओं का उन्मूलन:  यूसीसी धर्म के आधार पर कुछ व्यक्तिगत कानूनों में मौजूद भेदभावपूर्ण प्रथाओं को खत्म करने में मदद कर सकता है। समान नागरिक संहिता से सामाजिक भेदभाव खत्म होकर समाज मे समानता आएगी । 

15. अंतरधार्मिक विवाह: यह अंतरधार्मिक विवाहों के लिए एक समान प्रक्रिया और दिशानिर्देश प्रदान करेगा, कानूनी जटिलताओं को कम करेगा और सामाजिक एकीकरण की सुविधा प्रदान करेगा। खास कर अंतरधार्मिय विवाह के बाद जबरन धर्म परिवर्तन होता है ओर इस से हजारों लव जिहाद के विक्टिम होते है यूनिफॉर्म सिविल कोड से शादी के बाद यदि कोई जबरन धर्मांतर करने की कोशिश करता है तो उस पर दंडात्मक कारवाही होगी । लव जिहाद की रोकथाम के लिए लिंक पर क्लिक कर हमारी पोस्ट जरूर पढे LINK

16. महिलाओं के सुरक्षित अधिकार:  यूसीसी यह सुनिश्चित कर सकता है कि विवाह, तलाक, भरण-पोषण और संपत्ति के अधिकारों के मामलों में महिलाओं के अधिकार सुरक्षित हैं, चाहे उनकी धार्मिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो। इस से महिला सशक्तिकरन का लक्ष पूरा होगा ओर महिलों को भरण पोषण के साथ समाज मे समान न्याय मिलेगा 

17. कानूनों का सामंजस्य: यह विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों में मौजूद परस्पर विरोधी प्रावधानों और व्याख्याओं में सामंजस्य स्थापित करेगा।व्यक्तिगत कानूनों मे विभिन्न राज्य मे धार्मिक आधार पर भिन्नता खत्म होगी 

18. प्रशासन में आसानी: समान नागरिक संहिता सभी नागरिकों के  एक समान कानूनी ढांचा लागू करके न्याय प्रशासन को सरल बनाएगा। खास कर तलाक जैसे विषय पर देश मे धार्मिक आधार पर न्याय होता है यह खत्म कर देश मे समान न्याय प्रक्रिया समान नागरिक संहिता से सभव है जिस से प्रशासन मे आसानी होगी । 

19. स्पष्टता और निश्चितता: यह कानूनी कार्यवाही में स्पष्टता और निश्चितता लाएगा, क्योंकि व्यक्तिगत मामलों को नियंत्रित करने वाले कानूनों का एक सेट होगा।

20. सामाजिक संघर्षों की रोकथाम: समान नागरिक संहिता विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच व्यक्तिगत कानूनों पर विवादों से उत्पन्न होने वाले संघर्षों को कम कर सकता है। धार्मिक कानून खत्म कर समान नागरिक संहिता सामाजिक संघर्षों की रॉकथांम करेगा । 

21. राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना: यह सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता पर जोर देकर राष्ट्रीय पहचान और एकता की भावना में योगदान देगा।

22. व्यक्तिगत स्वायत्तता की सुरक्षा: यूनिफॉर्म सिविल कोडधार्मिक संबद्धताओं के बावजूद, व्यक्तिगत मामलों में व्यक्तिगत स्वायत्तता और पसंद को बरकरार रखेगा।
23. गोद लेने के कानूनों में एकरूपता: यह बच्चों के कल्याण को सुनिश्चित करते हुए पूरे देश में सुसंगत और समान गोद लेने के कानून स्थापित करेगा।

24. कानूनी फोरम शॉपिंग की रोकथाम: यूनिफॉर्म सिविल कोड शॉपिंग को हतोत्साहित कर सकता है, जहां व्यक्ति कथित फायदे या खामियों के आधार पर व्यक्तिगत कानून चुनते हैं।

25. वैश्विक परिप्रेक्ष्य: यह भारत को उन देशों की कतार में लाएगा जिन्होंने आधुनिक और प्रगतिशील दृष्टिकोण का प्रदर्शन करते हुए समान नागरिक संहिता लागू की है।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये लाभ बहस और अलग-अलग दृष्टिकोण का विषय हैं। यूसीसी का वास्तविक प्रभाव विशिष्ट प्रावधानों और कार्यान्वयन रणनीतियों पर निर्भर करेगा।

 

यूनिफॉर्म सिविल कोड के नुकसान

मित्रों जैसे हर सिक्के के दो पहलू होते है ठीक उसी तरह यूनिफॉर्म सिविल कोड के फायदे के साथ साथ यूनिफॉर्म सिविल कोड के नुकसान भी है । भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने से कुछ संभावित नुकसान या चिंताएं भी हो सकती हैं। आज हम ऐसे ही  20 संभावित कमियां के बारे मे विस्तार से चर्चा करेंगे 

1. धार्मिक स्वतंत्रता के लिए खतरा: आलोचकों का तर्क है कि समान नागरिक संहिता कानून लागू करके समुदायों की धार्मिक स्वतंत्रता और स्वायत्तता का उल्लंघन कर सकता है जो उनकी धार्मिक प्रथाओं और मान्यताओं के विपरीत हो सकता है। इन आलोचकों मे खास  कर मुस्लिम वोटों का तुष्टीकरण करने वाला विपक्ष तथा मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड शामिल है ।  धार्मिक स्वतंत्रा के आड़ मे ये कहते है की शारिया मे कोई हस्तक्षेप न हो लेकिन देश शरिया पे चलेगा या भारतीय सविधान इस प्रश्न का उत्तर मुस्लिम महिलाओ को खोजने की आवश्यकता है ।  तलाक मे शरिया जायज फिर चोरी करने पे हात काटने वाला शरिया कैसे नाजायज ? वहा आईपीसी कुँ ?

मुस्लिम ही नहीं बल्कि जाट पंचायत ओर अन्य हिन्दू समाज भी इसे विरोध कर सकता है बेटी को विरसात के अधिकर पर हिन्दू समाज मे अलग अलग विचारधारा वाले लोग है । 

2. सांस्कृतिक विविधता: अल्पसंखक वोट का तुष्टीकरण करने वाला विपक्ष यह भ्रम फैला रहा है की भारत विविध सांस्कृतिक परंपराओं वाला देश है, और समान नागरिक संहिता को लागू करने को विभिन्न धार्मिक समुदायों से जुड़ी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और प्रथाओं को एकरूप बनाने और कमजोर करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है ।

3. सामाजिक अशांति: समान नागरिक संहिता लागू करने से उन समुदायों में सामाजिक अशांति और प्रतिरोध हो सकता है जो इसे अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान के लिए खतरा मानते हैं। हो सकता है की इस्लाम खतरे मे है यह नारा देकर तथाकथीत शांतिप्रिय मुस्लिम समाज सड़कों पे उतर आए । 

4. बहुसंख्यकवादी पूर्वाग्रह की संभावना: विपक्ष ओर आलोचकों  का तर्क है कि यूसीसी को प्रमुख धार्मिक समूह के प्रति पूर्वाग्रह के साथ तैयार किया जा सकता है, जो संभावित रूप से अल्पसंख्यक समुदायों को नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन अगर बहु विवाह पद्धति ओर ट्रिपल तलाक इस कानून से रुक जाता है ओर मुस्लिम समाज की बहनों को न्याय मिलता है तो इस से अपल्पसंख्यक समाज का भला होगा या बुरा ?

5. परिवर्तन का विरोध: समान नागरिक संहिता के थोपे जाने का विरोध समाज कंठक कर सकते हैं, जिससे सामाजिक तनाव और विभाजन हो सकता है। देश मे सामाजिक अशान्ति ओर हिंसा फैलाने मे देश का विपक्ष ओर काँग्रेस पार्टी का रक्तरंजित इतिहास सभी को मालूम है राजनीति ओर सत्ता के लिए देश का विपक्ष आग मे घी डालने का काम कर सकता है । 

6. कानूनी चुनौतियाँ: समान नागरिक संहिता को अधिनियमित करने में कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि इसके लिए मौजूदा व्यक्तिगत कानूनों में महत्वपूर्ण संशोधन की आवश्यकता होगी, जो समय के साथ विकसित हुए हैं और जिनका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। इस कानून को पास कराने के लिए लोक सभा तथा राज्य सभा मे भी बहुमत के आधार पर पास होने की आवश्यकता है । 

7. जटिलता और कार्यान्वयन चुनौतियाँ: विभिन्न प्रथाओं और रीति-रिवाजों वाले विभिन्न समुदायों में एक समान कोड लागू करना एक जटिल कार्य हो सकता है और कार्यान्वयन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इस के लिए समाज प्रबोधन की जरुरत पड़ेगी 140 करोड़ की जनसंख्या वाले विशाल भारत देश मे यूनिफॉर्म सिविल की सही समय पर सही जागरूकता होना जरुरि है 

8. आम सहमति का अभाव: वर्तमान में यूनिफॉर्म सिविल के विशिष्ट प्रावधानों और प्रकृति पर राजनीतिक दलों, धार्मिक समूहों और हितधारकों के बीच कोई आम सहमति नहीं है, जिससे व्यापक स्वीकृति प्राप्त करना मुश्किल हो गया है।

9. व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर प्रभाव: विपक्ष आलोचकों का तर्क है कि यूसीसी नियमों का एक मानकीकृत सेट लागू करके व्यक्तिगत कानूनों के मामलों में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और विकल्पों को सीमित कर सकता है।

10. धार्मिक संस्थानों का विरोध: धार्मिक संस्थान जैसे मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड अपने मौजूदा व्यक्तिगत कानूनों को बदलने या संशोधित करने के किसी भी प्रयास का विरोध कर सकते हैं, जिससे राज्य के साथ टकराव हो सकता है। केंद्र ने अगर यूनिफॉर्म सिविल कानून पास किया तो भी मुस्लिम वोटों का तुष्टीकरण करने वाली राज्य सरकारे इसका विरोध कर सकती है जैसे CCA का विरोध पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ओर महाराष्ट्र की तत्कालीन उद्धव ठाकरे गुट की सरकार ने किया था । 

11. लैंगिक चिंताएँ: एक तर्क यह भी है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड मे मौजूदा लैंगिक असमानताओं को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं कर सकता है और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए पर्याप्त रूप से आगे नहीं बढ़ सकता है। यूनिफॉर्म सिविल कोड मे तृतीय पंथी को क्या सामाजिक न्याय मिलेगा ओर उनका सम्मान पूर्वक सामाजिक पुनर्वसन पर अभी भी स्पष्टता नहीं है । 

12. कानूनी बहुलवाद का नुकसान: विरोधियों का तर्क है कि समान नागरिक संहिता से कानूनी बहुलवाद का नुकसान हो सकता है, जहां विभिन्न समुदाय अपनी कानूनी प्रणालियों का प्रयोग कर सकते हैं।

13. सामाजिक ताने-बाने का विघटन: समान नागरिक संहिता को लागू करने से धार्मिक कानूनों पर आधारित मौजूदा सामाजिक संरचनाएं और रिश्ते बाधित हो सकते हैं, जिससे संभावित रूप से सामाजिक एकजुटता प्रभावित हो सकती है। लेकिन यह सिर्फ विपक्ष द्वारा फैलाया हुआ भ्रम है । 

14. तैयारियों की कमी:  समान नागरिक संहिता (यूसीसी) में परिवर्तन को संभालने के लिए कानूनी और प्रशासनिक प्रणालियाँ पर्याप्त रूप से तैयार नहीं हो सकती हैं, जिससे संभावित अराजकता और भ्रम पैदा हो सकता है। जैसा की मैने शुरू मे कहा इस कानून के पास होने पहले ओर बाद मे भी समाज प्रबोधन की आवश्यकता होगी ओर इस मे प्रशासन की भी कसोटी होगी । 

15. राजनीतिक चुनौतियाँ: 2014 के बाद देश विपक्ष ने अच्छे कामों मे टांग अड़ाने के अलावा दूसरा कुछ नहीं किया समान नागरिक संहिता मुद्दा अत्यधिक राजनीतिकरण का है, और इसे लागू करने के किसी भी प्रयास को विभिन्न राजनीतिक गुटों से महत्वपूर्ण विरोध का सामना करना पड़ सकता है। विपक्ष CAA के वक्त जिस तरह दिल्ली की सड़कों पर धरणे पे बैठ देश के विकास रथ को रोका था वही कोशिश समान नागरिक संहिता कानून पास कराने पर दुबारा हो सकती है याद रखे लोक सभा कुणाव सिर्फ 8 महीने मे है वोट के लिए विपक्ष किसी भी हद तक जा सकता है । 

16. अनसुलझे मुद्दे: व्यक्तिगत कानूनों के भीतर कई जटिल मुद्दे हैं, जैसे तलाक, संपत्ति के अधिकार और विरासत से संबंधित मुद्दे, जिनका यूसीसी के तहत सीधा समाधान नहीं हो सकता है। यदि हम समान नागरिक संहिता की बात करते है तो तृतीय पंथी का सामाजिक पुनर्वसन भी अभी तक स्पष्ट नहीं कब तक ये लोग ट्रेन मे भिक मांगते फिरेंगे इस देश मे जाती को आरक्षण मिल सकता है लेकिन विकलांग तथा तृतीय पंथी को नहीं  यह अनसुलझे मुद्दे कब सुलझेंगे क्या इसका समान नागरिक संहिता मे कोई हल है ? या सिर्फ ऐसे ही चलेगा कारवा जैसे 70 साल काँग्रेस ने चलाया है । 

17. स्थानीय रीति-रिवाज और प्रथाएँ: समान नागरिक संहिता उन स्थानीय रीति-रिवाजों और प्रथाओं को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं कर सकता है जो विशिष्ट क्षेत्रों या समुदायों में गहराई से निहित हैं। 

18. रूढ़िवादी तत्वों का विरोध: समुदायों के भीतर परंपरावादी या रूढ़िवादी तत्व ऐसे किसी भी बदलाव का विरोध कर सकते हैं जिसे वे अपने स्थापित रीति-रिवाजों और परंपराओं को चुनौती देने वाला मानते हैं। हालकी यह रूढ़िवादी रीति रिवाज को खत्म कर प्रगति की दिशा मे चलने का यह वक्त है । 

19. गलत व्याख्या की संभावना: समान नागरिक संहिता की गलत व्याख्या या दुरुपयोग हो सकता है, जिससे अनपेक्षित परिणाम और अन्याय हो सकता है। ऐसे भ्रम फैलाने मे देश का विपक्ष ओर हमारे राहुल गांधी जी को काफी अनुभव है ये कभी आलू से सोना निकालने वाली मशीन लाते है तो कभी आटे को लीटर मे गिनते है । 

20. लंबी और जटिल संसदीय प्रक्रिया: यूसीसी को अधिनियमित करने के लिए लंबे संसदीय प्रयासों, सर्वसम्मति निर्माण और लंबी बहस की आवश्यकता होगी, जिससे संभावित रूप से कार्यान्वयन में देरी और बाधाएं पैदा होंगी। जैसा की मैने  पहले कहा समान नागरिक संहिता कानून लोकसभा तथा राज्य सभा मे पास होने के लिए दो तिहाइ बहुमत की आवश्यकता होगी ओर केंद्र मे पास होने के बाद विभिन्न राज्यों के विधान सभा मे भी इस कानून को पास कराने की आवश्यकता होगी ओर काँग्रेस शासित  राज्यों मे यह कठिन कार्य है । 

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है देश का विपक्ष समान नागरिक संहिता के बारे मे वोट बैंक पॉलिटिक्स के चलते काफी भ्रम फैलता आया है ओर फैलता रहेगा हम ने आज यूनिफॉर्म सिविल कोड के फायदे साथ साथ यूनिफॉर्म सिविल कोड के नुकसान पर विस्तार से तटस्थ भूमिका आप के सामने रखी है यूनिफॉर्म सिविल कोड के नुकसान कुछ हो सकते है लेकिन इसे सरकार ओर मोदी जी अपने अनुभव से सुधार कर एक समान नागरिक संहिता प्रस्थापित कर देश को प्रगति की दिशा मे ले जाएंगे ओर हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाइ सभी धर्मों के महिलाओ को समान न्याय देंगे । 

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